गजब,मनरेगा में बिना काम के आ गए श्रमिकों के खाते में रूपये

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टिहरी जिले के जौनपुर विकासखंड के अंतर्गत अटल आदर्श ग्राम मंझ गांव इन दिनों मनरेगा के घपले को लेकर चर्चाओं में हैं कोरोना काल में भारत सरकार व राज्य सरकारों ने प्रवासियों को रोजगार से जोड़ने का आधार बनाया है लेकिन प्रधान पति सरकार की मंशा पर पानी फेरते हुए निजी हितों को देखते हुए योजनाओं की धनराशि बिना काम के श्रमिकों के खाते में डाल दी, अब प्रधानपति श्रमिकों से उन धनराशि को वापस मांग रहा है, कुछ श्रमिको ने खाते से धनराशि को निकालकर प्रधान पति को वापस दे दिए हैं, तो कुछ श्रमिको ने इसका विरोध किया,विरोध करने वाले श्रमिकों ने कहा कि प्रधानपति गांव में चल रही सरकारी योजनाओं में हस्तक्षेप करता रहता है और श्रमिकों के जॉब कार्ड में बिना हाजिरी व सत्यापन करते हुए बिना काम के खाते में धनराशि डाल दी, और प्रधानपति द्वारा बाहर से आए प्रवासियों को काम देने से मना कर रहे हैं ग्रामीण श्रमिकों ने कहा कि प्रधान पति द्वारा खाते में आए धनराशि को वापस मांग रहा है हमने इस धनराशि को देने से मना कर दिया है ओर कह कि जब तक ग्राम सभा की खुली बैठक नहीं होगी इस धनराशि का क्या करना है क्या नहीं, नही तो इस धनराशि को आपदा राहत कोष में भेज देंगे

बिना काम के खाते में धनराशि डालना अपने आप में खंड विकास अधिकारी एवं प्रधान की मिलीभगत को दर्शाता है जिन्होंने बिना जॉब कार्ड में हाजिरी व सत्यापन के धनराशि को श्रमिको के खाते में डाल दी जो सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है

ग्रामीणों के द्वारा मामले का खुलासा करने पर अब ग्राम प्रधान बीना देवी ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर जांच की मांग की है , प्रधान ने डीएम को पत्र लिखकर दिया है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि बिना काम के खाते में धनराशि कैसे आ गई जबकि नियम है कि जब तक ग्राम प्रधान व ग्राम विकास अधिकारी पंचायत विकास खंड अधिकारी द्वारा योजना का सत्यापन नहीं होता है यब तक धनराशि श्रमिको के खाते ने नही जा सकती, इससे कहीं ना कहीं प्रधान व अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजमी है

जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि यह मामला संज्ञान में आया है ग्रामीण श्रमिकों के खाते में बिना काम के धनराशि आना गंभीर विषय है इस मामले में जांच करवाने के लिए समिति गठित कर दी है और जांच के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी

वहीं राज्य मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि गांव में मनरेगा के कामों की एहम जिम्मेदारी प्रधान की होती है। यह रोजगार से जुड़ी योजना है। यदि किसी प्रधान द्वारा यह कृत्य किया जा रहा है, तो इसमें शिकायत दर्ज कर जांच की जानी चाहिए। क्योंकि पैसा तभी मिलेगा। जब वह काम पूरा करेगो। अब डिजिटलाईजेशन का समय है। सेटेलाईट से भी मानिटिरिंग होती है। त्रिवेंद्र की सरकार में भ्रष्टाचारी बच नहीं सकता।

बाईट-1-हुकुम सिंह-ग्रामीण श्रमिक
बाईट-2-जीत सिंह-ग्रामीण श्रमिक (मनरेगा की धनराशि लौटाने वाला ग्रामीण)
बाईट-3-दर्मियान सिंह-ग्रामीण श्रमिक
बाईट-4-सुरेंद्र सिंह डबरियाल, भूतपूर्व प्रधान, मझगांव
बाईट-5-विजय पाल कंडारी, ग्रामीण
बाईट-6-मंगेश घिल्डियाल, डीएम टिहरी
बाईट-7-रेखा आर्य, राज्य मंत्री महिला कल्याण एवं बाल विकास

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